STORYMIRROR

Zahiruddin Sahil

Abstract

4  

Zahiruddin Sahil

Abstract

क्रिमिनल हैं ये

क्रिमिनल हैं ये

1 min
395

कलम के वास्ते तन्हाइयां अच्छी थीं

नज़्म के वास्ते उदासियाँ अच्छी थीं।


इक शायर के वास्ते वो दर्द अच्छे थे

कहने को ग़म की परछाइयां अच्छी थीं।


मगर....!

एक हंसती-गाती ज़िन्दगी का क़त्ल हुआ जैसे

शायरी की जान हैं ये, मगर सच मे हत्यारे हैं !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract