Pawanesh Thakurathi
Inspirational
पेड़ लगाओ,
पौधे लगाओ तुम।
कोसी बचाओ तुम।
कोसी की महिमा
पुराण बताते हैं
कहते इसे हैं कौशिकी।
अल्मोड़ा की जीवनरेखा,
निकलती है पिनाथ शिखर से।
हाँ कोसी बचाओ तुम।
कोसी के कारण हरियाली है
है पानी की बहार
दिसंबर के मही...
गणतंत्र
तिरंगा
चोर
जीवन लाखों का...
प्यारी हिंदी ...
पत्रकार, तुम ...
डर
समस्या
हल को हुआ बंज...
संकल्पित हो, समर्पित हो कुर्बान हो तुम देश पर संकल्पित हो, समर्पित हो कुर्बान हो तुम देश पर
हम कभी थमते नहीं, हम कभी झुकते नहीं। हम कभी थमते नहीं, हम कभी झुकते नहीं।
चलो दीप जलाए हम देश के नाम आंगन में महक आए हम देश के नाम। चलो दीप जलाए हम देश के नाम आंगन में महक आए हम देश के नाम।
फाड़ सकता मैं उन लम्हों को जिन्होंने मुझे रुलाया है.. फाड़ सकता मैं उन लम्हों को जिन्होंने मुझे रुलाया है..
वंदन तुम्हारा, आँखें हुईं नम, यादें बिखरी इन वीथियों पर है। वंदन तुम्हारा, आँखें हुईं नम, यादें बिखरी इन वीथियों पर है।
अमृत महोत्सव की कहानी लिख दूंगी मैं। आन, बान, शान हौसलों की उड़ान लिख दूंगी मैं। अमृत महोत्सव की कहानी लिख दूंगी मैं। आन, बान, शान हौसलों की उड़ान लिख दूंगी मै...
हर वो ख़्वाब, हर वो ख्वाहिश, हर वो तम्मना , जो मेरे दिल में है ,उसे पूरा करूँगी मैं! हर वो ख़्वाब, हर वो ख्वाहिश, हर वो तम्मना , जो मेरे दिल में है ,उसे पूरा करूँग...
मातृभूमि के गौरव पर, न्योछावर उनकी काया है मातृभूमि के गौरव पर, न्योछावर उनकी काया है
जीवन की हर मुश्किल में मैं सदा साथ निभाऊंगा। जीवन की हर मुश्किल में मैं सदा साथ निभाऊंगा।
दूर है मंजिल लेकिन इतनी भी नहीं, कि तू पा ना सके। दूर है मंजिल लेकिन इतनी भी नहीं, कि तू पा ना सके।
वतन इज़्ज़त शोहरत नाज़ वतन की खुशबु खास वतन के जर्रे जर्रे की मुस्कान वतन इज़्ज़त शोहरत नाज़ वतन की खुशबु खास वतन के जर्रे जर्रे की मुस्कान
सीना हमारा भी छलनी होता है तिरंगे में लपटी हुई तुम्हारी छब देखकर सीना हमारा भी छलनी होता है तिरंगे में लपटी हुई तुम्हारी छब देखकर
गांव में उनकी बेवा बच्चे आहें भरते हैं चलो आज उनको ही सलामी भरते हैं गांव में उनकी बेवा बच्चे आहें भरते हैं चलो आज उनको ही सलामी भरते हैं
मन मेरे क्यों विचलित होता है? तू ईश्वर का ध्यान कर। मन मेरे क्यों विचलित होता है? तू ईश्वर का ध्यान कर।
बस मैं और तू का मिलकर बने जो एक वो हम कहाँ हैं ? बस मैं और तू का मिलकर बने जो एक वो हम कहाँ हैं ?
कभी भक्ति कभी प्रेम रस को, धीरे - धीरे उजागर करती कभी भक्ति कभी प्रेम रस को, धीरे - धीरे उजागर करती
उनके बलिदानों की खातिर ही भारत को नई पहचान दिलानी है उनके बलिदानों की खातिर ही भारत को नई पहचान दिलानी है
तीन रंग का परचम अपनी शान हुआ करता है। तीन रंग का परचम अपनी शान हुआ करता है।
स्वतंत्रता हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के अनेक त्यागो के बाद मिली स्वतंत्रता हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के अनेक त्यागो के बाद मिली
क्रांति का मंगल ने बिगुल बजाया, क्रांति का मंगल ने बिगुल बजाया,