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Garima Khandelwal

Inspirational

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Garima Khandelwal

Inspirational

कोरोना जीना सीखा रहा है

कोरोना जीना सीखा रहा है

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मोहल्ले की छतें अब गुलजार रहती हैं,

सुबह ऑनलाइन योग की क्लास रहती है।

कोरोना घर में संस्कार सीखा रहा है,

चाची दादी को बचपन के खेल खिला रहा है।

भैया ने सीख लिया बनाना कड़ाई पनीर,

दीदी ने सफाई का बीड़ा उठाया है।


न गाड़ी का धुंआ ना कारखाने की आवाज,

कोरोना जीना सीखा रहा है।

सिर ढका हो मुंह पर मास्क, किसी को छूने पर धोने हैं हाथ,

प्रकृति की महानता को सभी ने मान लिया है।

पापा ने छोड़ दिया है अब तंबाकू खाना,

जो कोई कर ना पाया लॉकडाऊन कर दिखा रहा है।


तेरी फिक्र का एहसास यू हो रहा है,

हम साथ रहते थे पर दूर थे बहुत।

विदेशी नौकरी पर घमंड जिन्हें बहुत रहा है,

मलाल परिवार के साथ का उन्हें हुआ बहुत।

स्वदेशी चीज का चस्का यूं लगा है,

विदेशी ब्रांड का पागलपन अब बहुत।


लॉकडाऊन ने मालिक नौकर को एक कर दिया,

कोरोना जात पात के भेद मिटा रहा है।

पूरा परिवार साथ में रामायण देखता है,

रिमोट लेने के झगड़े गिले-शिकवे मिटा रहा है।

बाहर की हवा से बचा रहा है,

कोरोना जीना सीखा रहा है।


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