दुबारा प्यार हो जाना
दुबारा प्यार हो जाना
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अक्सर होता देखा होगा,बगीचे में कुम्हलायी कली का गिर जाना,
गिर कर भी पराग का हवा में बिखर जाना,पराग से फिर नए पौधे का बन जाना,
मुनासिब है यदि,कुम्हलयी कली का फूलों में खिल जाना,
मुनासिब है इंसान को भी दोबारा प्यार हो जाना।
मुकम्मल पहली मोहब्बत मेरी, पर हो सकी ना वो कभी पूरी,
इश्क में मतलब का धोखा हमने खाया,जैसे टूटा तारा मेरी धरा से टकराया।
जैसे कोई फरिश्ता मेरी जिंदगी में आया,
मुझे मेरी कमियों के साथ उसने अपनाया,मेरी मोहब्बत को झूठा ना कहा,उसने और बतलाया,
मुनासिब है यदि,कुम्हलायी कली का फूलों में खिल जाना,
मुनासिब है इंसान को भी दोबारा प्यार हो जाना।
