STORYMIRROR

Prashant Tribhuwan

Abstract

4  

Prashant Tribhuwan

Abstract

कोई

कोई

1 min
296

तेरे इश्क में हो गया बर्बाद मैं

उठाने मुझे आगे आया ना कोई

तरसता रह गया तेरे लिए

तुम्हारे जैसा प्यार दिया ना कोई


जो दर्द -ए-इश्क है दिल में मेरे

लूटना चाहा पर लिया ना कोई

तेरे जाने के बाद देखी दुनिया

पर इस दिल पे छाया ना कोई


वो पगली तड़फी मेरे प्यार में

मिलने मेरे सिवा गया ना कोई

देखी है दुनिया की खूबसूरती

पर इन आंखों को भाया ना कोई


पता तो सबको था दर्द - ए- दिल

कम्मकत समज पाया ना कोई

तेरे जैसी खुशी इस जीवन में 

जाने के बाद तेरे लाया ना कोई


तेरे याद में मर के उठा हूं मैं

तेरे प्यार का जादू माया ना कोई।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Prashant Tribhuwan

Similar hindi poem from Abstract