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Pankaj Saha

Classics

4.9  

Pankaj Saha

Classics

कितना अजीब है न

कितना अजीब है न

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कितना अजीब है न

जो इंसान रोते हुए

जिन्दगी में आता है

वही इंसान सबको

रुलाकर चला जाता है।


कितना अजीब है न       

जो चीज शुरूआत में

बिल्कुल सही लगती है 

वही चीज गलत

साबित हो जाती है।

                    

कितना अजीब है न 

जो इंसान प्यार करना

सिखाता है

वहीं इंसान नफरत

सीखा जाता है।


कितना अजीब है न       

जो इंसान हँसाता है      

वही हमें रुलाता है।      

  

कितना अजीब है न

जो इंसान रिसता जोड़ता है

वहीं उसको तोड़ता है।


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