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Gurudeen Verma

Abstract

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Gurudeen Verma

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किसी ज्योति ने जीवन दिया

किसी ज्योति ने जीवन दिया

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किसी ज्योति ने मुझको, यूँ जीवन दिया।

गुम अंधेरों में था, मुझको रोशन किया।।

किसी ज्योति ने मुझको -----------------------।


पैदा उस घर हुआ, थी गरीबी जहाँ।

कांटे थे हर कदम, नहीं सुविधा जहाँ।।

जीवन खुशियों से शिक्षा ने,भर तब दिया।

किसी ज्योति ने मुझको ----------------------।


जग की रस्मों - रिवाजों से अंजान था।

ना कोई शौक था, इतना नादान था।।

कुछ सपनों ने मुझको, जगा तब दिया।

किसी ज्योति ने मुझको -------------------।


महके गुलशन मेरा, ऐसा हमदम मिले।

घर हो आबाद मेरा,प्यार खुशियां मिले।।

मुकम्मल मेरे सपनों को, उसने कर दिया।

किसी ज्योति ने मुझको -----------------------।


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