ख्वाबों की रानी भाग 4
ख्वाबों की रानी भाग 4
तेरी जुल्फों के साए में, मैं सोया रहता हूं
जैसे खुद ही खुद से, मैं खोया रहता हूं।
ईश्क के इस नशे में इतना चुर हो चुका हूं
की मद को मदमस्त मैं ढोया रहता हूं।
तेरे होठों की रवानी का, मैं गुलाम हो गया
तेरी आंखों का मुझ पर ऐसा जाम हो गया।
सौंदर्य का क्या बखान करूं एक कवि बन
तुझ पर लिखकर हर लफ्ज़ बदनाम हो गया।
तेरी सांसों के हर तार पर मेरा नाम चाहता हूं
दिल की बातों का तेरे को मेरा पैगाम चाहता हूं।
मत पूछ-कितना डूबा हूं तेरे इश्क़ के जंजाल में
खुद से तेरे हुस्न के चर्चे खुले आम चाहता हूं।
एक बार नजर मिलाकर कह दे नहीं चाहती हूं
तू देख तो सही खुद को खुद से आजाद कर दूंगा।
तरसेगी इस इश्क के रांझणा को और ना तरसी तो
जिंदगी का जाम ही क्या जो जीता रहूं
मौत को मौत से बर्बाद कर दूंगा।
