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N.Beena Gupta

Abstract

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N.Beena Gupta

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खुशी

खुशी

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जाने क्या मिल गया,मन कुलाचे भरे 

इतना इतराए क्यूँ,क्यूँ न कुछ ये कहे 

होंठो मे छलकती हँसी को छुपाए, 

आईना भी इसे,आज बिल्कुल न भाए

 मन की रफ्तार नापो,पकड़ में ना आए  

 इसकी धड़कन किसी .....से छुप न पाए  

 बंद मुट्ठी में ऐसा,....छिपा है क्या जाने   

ओट आँचल की करके उसे क्यू छिपाए 

बैठी खुद से क्या बातें बनाने लगी  ‌   

बावरी सी बनी ..... गुनगुनाने लगी।


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