STORYMIRROR

Sunita Katyal

Abstract

2  

Sunita Katyal

Abstract

खिली धूप

खिली धूप

1 min
299

सुबह मेरे लिए ताजगी का जैसे पर्याय सा हो गई है

हां सुबह सुबह दो चाय जरूर चाहिए होती हैं

उसके लिए मेरे पतिदेव जिंदाबाद

चाय के साथ कुछ समय मोबाइल और अपने लिए

फिर तैयार हो कर ईश वंदन

फिर घर का सामान इधर उधर

और पतिदेव को अपने हाथ से नाश्ता बना कर खिलाना

ये भी तो जरूरी है भाई

क्योंकि कल सुबह फिर चाय भी तो पीनी है

जब तक सूरज खिला रहता है

मै भी खिली धूप सी खिली खिली रहती हूं


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract