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Anjali Singh

Abstract

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Anjali Singh

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खबर

खबर

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जब भी कभी सोचूं तेरी जिंदगी से 

जाने के बारे मे बारिशे है होती 


रूठ जाऊँ मै अगर तुझसे कभी 

तो घिर आते है बादल काले आसमाँ मे 


नित गुफ़्तगू करती हूँ मै तेरी इस आसमाँ से 

तेरे सवालों के जवाब है इन के पास 


जब भी कभी खबर लेनी हो मेरी 

इस आसमाँ से लेना तुझे और कोई न 

दे सकता है खबर मेरी 


दोस्ती जो की है इस आसमाँ से मैंने 

मेरे दिल की जो ये सुनते है मुझे राह 

ये ही दिखाते है समझते है समझाते है 


इस आसमाँ को है जमीं का पता 

इसे खबर तेरी भी है मेरी भी है! 



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