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Suresh Kulkarni

Abstract

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Suresh Kulkarni

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काहे झगडा!

काहे झगडा!

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मत करो झगडा कभी 
डॉक्टर वैद्य और सेवकोंसे 

नही वो खुदा नही जादूगार 
वो तो है ईन्सान हमारे जैसे 

पढेलीखे मेहनत से अपने बलबूते पे 
फिर कैसी दुष्मनी आकस ऊनके संग?

करत है उपचार दिलो जानसे 
देत है सलाह क्षण क्षण 
पर आप सबका सहकार्य भी चाहीये!

आखिर जिंदगी और मौत 
सब ईश्वर की देन 
कोई कुछ भी करे
जो है होना हो के रहेगा!

सुरेश कुळकर्णी 


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