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abhi 07

Inspirational

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abhi 07

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काबिलीयत

काबिलीयत

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आज मन में बड़ी कशमकश है 

अपनी ही खोज में हर शख्स है 


हूँ काबिल या काबिलीयत की कमी है

मन की आंखों में न जाने क्यों नमी है 


इच्छा हो पूरी हर किसी की ये ख्वाहिश है

संघर्ष की डगर में काबिलीयत की आजमाइश है 


हो काबिल करो साबित कर पूरे जो ख्वाहिश है 

आज फिर तुम्हारे काबिलीयत से यही फरमाइश है 


यही किस्मत मान झुकना है या यहां नहीं रुकना है 

पूछो अपने लड़खड़ाते कदमों से किस पथ पर टिकना है


अगर पाना है हर वो मुकाम जो तेरा सपना है 

तो फिर आज किस्मत नहीं काबिलीयत से जंग जितना है ।।



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