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abhi 07

Others

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abhi 07

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उम्मीद और इंसान की लड़ाई

उम्मीद और इंसान की लड़ाई

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दिन अच्छा गुजरे उम्मीद 

ये हर किसी का होता है , 

सांसारिक मायाजाल में 

हर कोई खुद खोया होता है 


अहम ,गुस्सा ,भेदभाव, अमीरी गरीबी

 का बीज भी तो हमने खुद बोया होता है 


फिर दिन हमारा ही अच्छा गुजरे 

ये उम्मीद हमें कैसे किसी से होता है 


उम्मीद का रोना हर इंसान रोता है

विडंबना तो ये है अपने आगे वो 

देखता हर किसी को छोटा है 


खुद अहम की पट्टी बांधकर 

दिन भर अब क्यों रोना रोता है 

सिर्फ दिन हमारा ही अच्छा गुजरे

ये सोचना भी तो एक धोखा होता है 


बेटा ,बेटी ,भाई किसी का 

हर कंधों पे भी एक बोझ होता है 

जिम्मेदारियां उसकी पूरी हो सारी

उसको भी तो ये उम्मीद होता है 


दिन सिर्फ हमारा ही अच्छा गुजरे 

कैसे हमें से ये उम्मीद होता है।



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