Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!
Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!

Amrita Sinha

Tragedy


4.4  

Amrita Sinha

Tragedy


जवानों की देशभक्ति

जवानों की देशभक्ति

1 min 27 1 min 27


वो सांझ में आया कंधे पे, 

बेजान पड़ा तिरंगे में

जो ग़ुलाब सुबह से ताक में थे,

अब चौड़ी छाती पे ठाठ से थे।


सुबह गुड़िया उनकी सो रही थी

मत्थ चूम वो निकल पड़े बस,

दहल गया वो सांझ का मौसम 

वो पिता देख दहाड़ उठी जब।


सुबह ५ फूट की माप ऊंचाई, 

ले ३० इंच का सीना वो

रेहमत ले निकला घर से,

मां का था एक ही बेटा वो।

जब सांझ को साथी घर को आये,

पुर्जों में वो बेटा लाए,

मां ढूंढ रही थी आंचल अपनी

बटोरने उन टुकड़ों को।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Amrita Sinha

Similar hindi poem from Tragedy