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Sanket Patil

Action Inspirational Thriller

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Sanket Patil

Action Inspirational Thriller

जवानों का नया साल

जवानों का नया साल

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माफ करना माँ,

इसबार नए साल पर घर नही आ पाऊंगा।

सीमा पर तैनात होकर,

भारतमाता का कर्ज जरूर चुकाऊंगा।


नए साल का पहला दिन,

पठाको की धूम धाम से मना न सका तो क्या हुआ।

गोलियों की बौछार से जरूर मनाऊंगा,

पर माफ करना माँ इस बार

नए साल पर घर नही आ पाऊंगा।


दिल में तेरी दुआओंको रखकर,

मैं हमेशा मुस्कुराऊंगा।

फक्र से अपने तिरंगे को,

आसमान की ऊंचाइयों में लहराऊंगा।

पर माफ करना माँ,

इस बार नए साल पर मैं घर नही आ पाऊंगा।


मैं सोचता रहता हु माँ,

कब घर आकर तुझे सिने से लगाऊंगा।

अगर जरूरत पड़े तो इसी सिने पर,

हजारों गोलियां झेल जाऊंगा।

इस मात्रभूमि के लिए शहीद हो कर,

तेरी ममता का कर्ज चुकाऊंगा।


पर माफ करना माँ,

इस बार नए साल पर मैं घर नही आ पाऊंगा।


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