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Anjali Singh

Abstract


4.0  

Anjali Singh

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जरूरत तेरी

जरूरत तेरी

1 min 183 1 min 183

नीले आसमान में चाँद को है

जरूरत तेरी

बारिशों को बहती हवा सी

जरूरत तेरी


तेरी जगमगाहटे पैरों की वो आहटे

देती है सहारा उन्हें जो बीच सफर में

है खड़े अकेले रास्ता ना दिखता जिनको

मिंजिले ना मिलती जिनको

उनकी जिन्दगी का रौशन सितारा तू है


तू नही तो जिन्दगी नही

सबको है जरूरत तेरी 

यू ना तू खामोश रह चल उठा कलम अपनी

क्यूंकि दुनिया को है जरूरत तेरी!



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