End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!
End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!

Anjali Singh

Abstract


4.0  

Anjali Singh

Abstract


जरूरत तेरी

जरूरत तेरी

1 min 193 1 min 193

नीले आसमान में चाँद को है

जरूरत तेरी

बारिशों को बहती हवा सी

जरूरत तेरी


तेरी जगमगाहटे पैरों की वो आहटे

देती है सहारा उन्हें जो बीच सफर में

है खड़े अकेले रास्ता ना दिखता जिनको

मिंजिले ना मिलती जिनको

उनकी जिन्दगी का रौशन सितारा तू है


तू नही तो जिन्दगी नही

सबको है जरूरत तेरी 

यू ना तू खामोश रह चल उठा कलम अपनी

क्यूंकि दुनिया को है जरूरत तेरी!



Rate this content
Log in

More hindi poem from Anjali Singh

Similar hindi poem from Abstract