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Anjali Singh

Abstract

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Anjali Singh

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जरूरत तेरी

जरूरत तेरी

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नीले आसमान में चाँद को है

जरूरत तेरी

बारिशों को बहती हवा सी

जरूरत तेरी


तेरी जगमगाहटे पैरों की वो आहटे

देती है सहारा उन्हें जो बीच सफर में

है खड़े अकेले रास्ता ना दिखता जिनको

मिंजिले ना मिलती जिनको

उनकी जिन्दगी का रौशन सितारा तू है


तू नही तो जिन्दगी नही

सबको है जरूरत तेरी 

यू ना तू खामोश रह चल उठा कलम अपनी

क्यूंकि दुनिया को है जरूरत तेरी!



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