STORYMIRROR

Uma Pathak

Abstract

3  

Uma Pathak

Abstract

जिंदगी

जिंदगी

1 min
335

जिंदगी पन्नों की तरह है

हर दिन नया अध्याय होता है।


कौन जानता जिंदगी में

क्या लिखा है।


गिर कर उठना जिंदगी या

खोकर पाना जिंदगी है।


काश कुछ ऐसा हो जाए

जो गलत लिखा है।


जिंदगी में वह पन्ना फट जाए

अंधेरे में माचिस की तिल्ली से

रोशनी होती है।


वैसे ही जिंदगी में अच्छे

दोस्तों की कमी होती है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract