Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

ARUN SINGH

Abstract Comedy

1  

ARUN SINGH

Abstract Comedy

जिंदगी अब क्या बन गई है

जिंदगी अब क्या बन गई है

1 min
35


बीड़ी अब 

सिगरेट

बन गयी,

  

चटाई 

कारपेट बन गयी,

 

मुक्केबाजी

बॉक्सिंग बन गयी,


कुश्ती हमारी

रेसलिंग बन गयी,


गिल्ली डंडा 

क्रिकेट CRICKET बन गया, 


हमारा भारत 

ग्रेट बन गया..


गाय हमारी 

काऊ बन गयी, 


शर्म हया अब

वाओ बन गयी,


काढ़ा हमारा 

चायबन गया, 


छोरा बेचारा 

GUY बन गया,


कठपुतली अब 

PUPPET बन गया,


.हमारा भारत

GREAT बन गया..


हल्दी अब 

TURMERIC बन गयी,


ग्वारपाठा 

ALOVIRA बन गया,


योग हमारा 

YOGA बन गया, 


घर का जोगी 

JOGA बन गया,


 भोजन 100 रु. 

PLATE बन गया, 


हमारा भारत 

GREAT बन गया..


 घर की दीवारेँ

 WALL बन गयी, 


दुकानेँ 

SHOPING MALLबन गयीँ,


गली मोहल्ला

WARD बन गया, 


ऊपरवाला 

LORD बन गया,


रक्षाकवच

HELMET बन गया, 


हमारा भारत 

GREAT बन गया..


 माँ हमारी

 MOM बन गयी, 


छोरियाँ 

 ITEM BOMB बन गयीँ,


  पिताजी अब 

  DAD बन गये, 


घर के मालिक 

HEAD बन गये,

   

हमारा भारत 

GREAT हो गया..


मनमोहन बिलकुल फेल हो गया

केजरीवाल भी खेल हो गया 


आडवाणी हमेशा के लिए 

पी एम् इं वेट हो गया  


क्यों की मोदी बीजेपी में   

 हैवीवेट हो गया.


अच्छे दिनों का सपना 

फिलहाल लेट हो गया,


मोदी फिर भी 

ग्रेटT हो गया..


 तुलसी की जगह

 मनी प्लांट ने ले ली..!


चाची की जगह 

आंटी ने ले ली..!


पिता जी डेड हो गये..!  

भाई तो अब ब्रो हो गये..!  

बेचारी बेहन भी अब 

सिस हो गयी..!


दादी की लोरी तो अब

टांय टांय फिस्स हो गयी..!


टी वी के सास बहू में भी

अब साँप नेवले का रिश्ता है..!

पता नहीं एकता कपूर

औरत है या फरिश्ता है..!!!


जीती जागती माँ बच्चों के

लिए ममी हो गयी..!


रोटी अब अच्छी कैसे लगे

 मैग्गी जो इतनी यम्मी हो गयी..!


गाय का आशियाना अब

शहरों की सड़कों पर बचा है..!


विदेशी कुत्तों ने लोगों के

कंधों पर बैठकर इतिहास रचा है..!


बहुत दुखी हूँ ये सब देखकर

दिल टूट रहा है..!


हमारे द्वारा ही हमारी

भारतीय सभ्यता का 

साथ छूट रहा है!


   


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract