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Vikrant Narkhede

Romance

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Vikrant Narkhede

Romance

जीवन

जीवन

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कभी जुल्म जैसी लगी

तो कभी सजा सी।


कभी तूफां सी लगी

तो कभी हवा सी।


जिंदगी तू जी या

अक्स है मेरा।

 

कभी चुप रहती नहीं

कभी बेजुबां सी।


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