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Puru Malav

Inspirational


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Puru Malav

Inspirational


जीवन - वस्त्र

जीवन - वस्त्र

1 min 10 1 min 10

मैं सिलना चाहूंगा पुनः

जीवन के वस्त्र को

यदि सम्भव हो तो

महीन या मोटा जैसा भी मिला मुझे


मैं सफ़ेद ही रखूंगा इसे

पर बटोरूंगा प्यार के रंग

और रंगता चला जाऊंगा 


जहां भिचती हैं मेरी आत्मा तंगाई से

वहां कुछ ढीला छोड़ दूंगा

बटन कम ही होंगे

बस दो या तीन

मगर जेबें बहुत रखूंगा


एक मैं रखूंगा टॉफियां

जिन्हें काफ़ी ना- नुकुर के बाद

बच्चों में बांट दूंगा

और बदले में भर लूंगा प्यार


एक में बुजुर्गों की दवाइयां

जिन्हें मैं खुद देने जाऊंगा

और बदले में भर लाऊंगा दुआएं

उसी जेब में


एक जेब सीने पर 

जिसमें कलम नहीं गुलाब रखूंगा

कलम हाथ में रखूंगा 

हथियार की तरह


और एक चोर जेब 

छुपाये रखूंगा जिसमें सारे दुःख

अपने और पराए


सिलना चाहता हूं किफायत से

ताकि औरों के लिए भी कुछ बचा सकूं।


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