STORYMIRROR

Reena Ughreja

Inspirational

4  

Reena Ughreja

Inspirational

जहाँ उड़े धुँआ

जहाँ उड़े धुँआ

1 min
209

निकली उस गली जिस दिन,

देखा मैंने पहली बार।

उड़ गयी तबसे मेरी नींद,

सामने आता है वो दृश्य बार - बार।


उम्र थी उसकी करीब सात,

बैठा था अपने दोस्तों के साथ।

समय था पाठशाला जाने का,

बोला जूथ माँ से छुपाने का।


गई उस गली में मैं फिर वहां,

हाथ में थी वही सिगरेट।

अबकिबार साथ मेरे थी उसकी माँ,

लगादी उसे एक चमेट।


बुरी सांगत का है ये इनाम,

सिगरेट ने जिसको छुआ।

ज़िन्दगी बन जाये हराम,

जहाँ उड़े धुआं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational