STORYMIRROR

Roohani Wadhwa

Abstract Romance Tragedy

4  

Roohani Wadhwa

Abstract Romance Tragedy

जब करीब थे तुम मेरे

जब करीब थे तुम मेरे

1 min
423

जब करीब थे तुम मेरे

तब अहसास हो ना पाया मुझे

अब दूर हो तो बेचैन हूं मैं तुम्हारे लिए


जब करीब थे तुम मेरे

तब अहमियत दे ना पाई मैं तुम्हें

अब दूर हो तो याद करती हूं मैं तुम्हें


जब करीब थे तुम मेरे

तब तुम्हारा अनुराग समझ ना पाई मैं

अब दूर हो तो परवाना करती हूं मैं तुमसे


जब करीब थे तुम मेरे

तब हामी दे ना पाई मैं तुम्हे

अब दूर हो तो कबूल करती हूं मैं तुम्हें


जब करीब थे तुम मेरे

तब हंसा करती थी मैं तुमपे

अब दूर हो तो रोती हूं मैं तुम्हारे लिए


जब करीब थे तुम मेरे

तब जाने से रोक ना पाई मैं तुम्हे

अब दूर हो तो वापास बुलाना चाहती हूं मैं तुम्हें

वापास बुलाना चाहती हूं मैं तुम्हें

वापास बुलाना चाहती हूं मैं तुम्हें।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract