STORYMIRROR

Priya Gupta

Romance

4  

Priya Gupta

Romance

इस प्यार को क्या नाम दूँ

इस प्यार को क्या नाम दूँ

1 min
317

यूँ बीत गए ये साल कि

पता ही नहीं चला 

कभी हँसते कभी झगड़ते 

कभी एक दूसरे की खींचते 


ना कभी ये कोई और हो कभी

ये लगा हम कोई और है 

ज़िन्दगी के इस सफर में यूँ साथ

निकल गया की पता ही नहीं चला 


चाहते तो यही है

ज़िन्दगी भर यूँ निकल जाए 

चाहे साथ रहे या ना रहे

हाथों में ये हाथ रह जाए

 

वक़्त का कुछ पता नहीं

नहीं कब पलट जाए 

बस हाथों में ये हाथ रह जाए 

कुछ यूँ बीते ये साल कि

पता ही नहीं चला 


आधे रस्ते तुम चले 

आधे में चली 

हाथों में हाथ पकड़कर 

मुश्किल काट ली 


कभी तुम्हारा यु मुस्कुराना 

कभी तुम्हारा यु रूठ जाना 

और हर बार मुझे

ही तुम्हें मानना 


हर दिन बस ये सोचना

आज क्या है खाना क्या पकाना 

अब क्या कहे कुछ यूँ

बीत गए ये साल 


तुम्हारा यूँ हाथो में हाथ पकड़ना 

हर मोड़ पर मुझे थामना  

ज़िन्दगी क्या है मुझे बताना 

हर मुसीबत से बचाना 


अब क्या कहे कुछ

यूँ बीत गए ये साल।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance