इस प्यार को क्या नाम दूँ
इस प्यार को क्या नाम दूँ
यूँ बीत गए ये साल कि
पता ही नहीं चला
कभी हँसते कभी झगड़ते
कभी एक दूसरे की खींचते
ना कभी ये कोई और हो कभी
ये लगा हम कोई और है
ज़िन्दगी के इस सफर में यूँ साथ
निकल गया की पता ही नहीं चला
चाहते तो यही है
ज़िन्दगी भर यूँ निकल जाए
चाहे साथ रहे या ना रहे
हाथों में ये हाथ रह जाए
वक़्त का कुछ पता नहीं
नहीं कब पलट जाए
बस हाथों में ये हाथ रह जाए
कुछ यूँ बीते ये साल कि
पता ही नहीं चला
आधे रस्ते तुम चले
आधे में चली
हाथों में हाथ पकड़कर
मुश्किल काट ली
कभी तुम्हारा यु मुस्कुराना
कभी तुम्हारा यु रूठ जाना
और हर बार मुझे
ही तुम्हें मानना
हर दिन बस ये सोचना
आज क्या है खाना क्या पकाना
अब क्या कहे कुछ यूँ
बीत गए ये साल
तुम्हारा यूँ हाथो में हाथ पकड़ना
हर मोड़ पर मुझे थामना
ज़िन्दगी क्या है मुझे बताना
हर मुसीबत से बचाना
अब क्या कहे कुछ
यूँ बीत गए ये साल।

