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Munendra Parashar

Abstract

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Munendra Parashar

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इस आग का जवाबदेह होगा कौन ।

इस आग का जवाबदेह होगा कौन ।

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बिना कारण लगाई हुई आग का

जवाबदेह होगा कौन।

इस आग में गुम गए कई घरों के

पथपवारों को वापस लाएगा कौन।


जिनका पथवार ना रहा उन घरों की

कश्तियों को पार लगाएगा कौन।

आग बेमतलब लगी है

इसको बुझाएगा कौन।


जिन बूढ़े मां बाप की लाठी कहीं खो गई

इस तूफान में उनको अब सहारा देगा कौन।

कुछ घरों को जलते देख, कल जिन से

मिला था आज उनको खोने से सहमा सा रह गया हूं।


बस सोच रहा हूं आज किसी और की कश्ती

उजड़ी है कल को हमारी भी बारी होगी।

हम तो अपने दैनिक जीवन के लिए घरों से

निकले थे कि बीच में ही तूफान आ गया।


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