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Pranav Kale

Tragedy

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Pranav Kale

Tragedy

इंसानियत

इंसानियत

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आज इंसानियत को दुनिया से मिटते हुए देख रहा हूं....

एक रईस के सामने एक बच्चे को खाने के लिए भीख मांगते देख रहा हूँ .....

लोगों को अपने हिस्से का थोड़ा सुकून भी दूसरों को देने में शर्म आती है.....

तो अब अपनी तकलीफ के समय क्यों उन्हें दूसरों की जरूरत होती है.....



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