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Pranav Kale

Others

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Pranav Kale

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सुबह

सुबह

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सुबह की ये धूप आज बहुत सुहानी है......

इनमें चिड़ियों की चुलबुल सी किलकारी है.....

यह ठंडी हवाएं भी हैं बोल रही.....

इनको भी कोई बात सुनानी है....

राह देख रहा रास्ता घर का भी आज.....

फिर भी भटकना बंजारों सा कैसी ये मेरी नादानी है....

इस सुबह ने तो अपनी सुना दी, अब मेरी बारी है...

अब मुझे भी इसे अपनी दास्तां सुनानी है.....



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