STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Inspirational

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Inspirational

हर जगह तेरा वास है

हर जगह तेरा वास है

1 min
508

कण कण में व्याप्त है तू 

हर जगह तेरा प्रकाश है 

नभ, धरा , पाताल लोक में 

हे ईश्वर, तेरा ही वास है । 

हवा की खुशबू में है तू 

तुझसे ही उजालों में चमक है 

तारों की टिमटिमाहट तुझसे

तुझसे ही चाँदनी की दमक है 

तू है तो बादलों में पानी है 

तेरे दम से छटा आसमानी है 

सागर की मौजों में ठिकाना तेरा 

तेरे होने से नदियों में पानी है । 

पत्तों की सरसराहट तुझसे

फूलों का रंग और गंध भी तू 

जड़ में भी तू चेतन में भी तू 

वायु की गति तेज मंद में भी तू 

गरीब की झोंपड़ी से लेकर 

"एंटीलिया" में भी तू ही तू है 

मैं जिधर भी देखूँ तू नजर आये

पतझड़ में बहार में तू ही तू है 

जो तुझे आज तक जान नहीं पाये 

तेरी अपार शक्ति को मान नहीं पाये 

उनके अलावा और कौन कह सकता है

कि "वहां पर कोई नहीं रहता है" ।। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational