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RASHI SRIVASTAVA

Abstract

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RASHI SRIVASTAVA

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होली है

होली है

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रंग बिरंगी होली है,

बुरा न मानो होली है।


होली में रंग बरसते हैं

सब नाचते गाते थिरकते हैं

सतरंगी समां बन जाता है

रंगों के बाण जब चलते हैं 

 

गुजिया, चिप्स बनाते हैं

मिल-बैठके फिर सब खाते हैं

गुलाल प्यार का लगते ही 

दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं


जब गले मिलें एक दूजे से

तो मन में कोई बैर ना हो

हर जगह पे भाईचारा हो

कोई भी यहाँ पे गैर न हो


रंग बिरंगी होली है

बुरा न मानो होली है।


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