Sandeep Sharma
Abstract
मिलकर चलेंगे,
साथ रहेंगे,
दुनिया चाहे जो बोले,
हम साथ-साथ हैं, और
साथ-साथ रहेंगे।
संस्कारों के धनी हैं हम,
विपत्ति में भी साथ हैं हम,
कोरोना को भी हरायेंगे
विश्व गुरु कहलायेंगे।
वयं रक्षाम् व...
दीप
सपने
बुजुर्ग
परिश्रम
तानाशाही
ताकत
सरस्वती मंदिर
पर्यटन
प्रेम
सहयोग, सद्भावना की मेरी अपनी ही आदत से मेरा जीवन दुष्कर हो रहा है। सहयोग, सद्भावना की मेरी अपनी ही आदत से मेरा जीवन दुष्कर हो रहा है।
ध्वनि उसके कानों तक नहीं गूंज पाती थी हाथों के संकेतों से ही ... जीवन की परिभाषा समझ ध्वनि उसके कानों तक नहीं गूंज पाती थी हाथों के संकेतों से ही ... जीवन की ...
बातों की ये घुट्टी, हर दिन घिस कर, उसे चटायी जाती हैं l बातों की ये घुट्टी, हर दिन घिस कर, उसे चटायी जाती हैं l
क्यों इतनी दूरियां सी हो गई है आखिर ये मजबूरियां और बेबसी क्यों क्यों इतनी दूरियां सी हो गई है आखिर ये मजबूरियां और बेबसी क्यों
हर दिन ही उत्सव है भारत में मगर खास दीवाली और होली। हर दिन ही उत्सव है भारत में मगर खास दीवाली और होली।
रहूँगी ऐसी ही हमेशा जो बदल जाए भला वो पिंकी कैसी ! रहूँगी ऐसी ही हमेशा जो बदल जाए भला वो पिंकी कैसी !
मुगल भी रह जाते थे अचंभित होकर देख वीर शिवाजी के युद्ध कौशल के ऐसे रंग मुगल भी रह जाते थे अचंभित होकर देख वीर शिवाजी के युद्ध कौशल के ऐसे रंग
जिंदगी न मेरी थी, न है और न ही हो सकती है उसने जब चाहा मुझे संसार में भेजा दिया था जिंदगी न मेरी थी, न है और न ही हो सकती है उसने जब चाहा मुझे संसार में भेजा दि...
तमाम शहर बना बैठा है रकीब हमारा यहाँ तेरा पता हमें बताता कौन है तमाम शहर बना बैठा है रकीब हमारा यहाँ तेरा पता हमें बताता कौन है
मजदूर हो किसान हो या कि हो खेतिहर , मेरे गाँव में होने लगा है शामिल थोड़ा शहर। मजदूर हो किसान हो या कि हो खेतिहर , मेरे गाँव में होने लगा है शामिल ...
बहना ब्याह कर ससुराल जाये, प्यार भाई को दूज पर खींच लाये। बहना ब्याह कर ससुराल जाये, प्यार भाई को दूज पर खींच लाये।
जुड़े हुए दिल के तार हमारे ए दोस्त, तू दूर होकर भी पास, जुड़े हुए दिल के तार हमारे ए दोस्त, तू दूर होकर भी पास,
अवसर मिलने पर भी धन का गबन या घोटाला करता नहीं। अवसर मिलने पर भी धन का गबन या घोटाला करता नहीं।
बैठा सबके दिल में हिंदुस्तान, क्यों नहीं उसे जगाते, बैठा सबके दिल में हिंदुस्तान, क्यों नहीं उसे जगाते,
बिजली की कड़क ध्वनि, सब मन को बड़ा सुकून दे रहे थे। बिजली की कड़क ध्वनि, सब मन को बड़ा सुकून दे रहे थे।
तो यह जग फिर से रंगों से लहराएगा रंगों से लहराएगा। तो यह जग फिर से रंगों से लहराएगा रंगों से लहराएगा।
भीड़ भरी इस दुनिया मे पहचान बनाने मैं चला। भीड़ भरी इस दुनिया मे पहचान बनाने मैं चला।
हाँ अब काफी साल बीत गए पुरानी बातों को याद करके हाँ अब काफी साल बीत गए पुरानी बातों को याद करके
किंतु आ जाए कोई भी मुसीबत तो एक दूजे की रक्षा को रहते तैयार किंतु आ जाए कोई भी मुसीबत तो एक दूजे की रक्षा को रहते तैयार
शमशीर-ए-नाकामी ने कर दिए ना जाने कितनों के सर कलम शमशीर-ए-नाकामी ने कर दिए ना जाने कितनों के सर कलम