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Manoj Kumar

Inspirational

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Manoj Kumar

Inspirational

हिन्दी हमारी शान

हिन्दी हमारी शान

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भाषा हमारी हिन्दी, यह शान है हमारी।

जितनी जगत की बोली, सबसे लगे हैं प्यारी।।


लिपि नागरी है इसकी, नियमों से यह बंधी है।

सुंदर सहज है सम्यक,सुर साज से सधी है।।


आते हैं हम धरा पर, वात्सल्य यह दिखाती।

अज्ञानता के बादल, यह ज्ञान से हटाती।।


बढ़ती उमर हमारी,जब हम जवान होते।

श्रंगार की वाटिका हम सुरभिति सदा सजाते।।


मित्रों के साथ हम सब, हंसते सदा हंसाते।

तन मन भी स्वस्थ रहता,रस हास्य का बहाते।।


दुश्मन के सामने पग, पीछे नहीं हटाते।

वीरों में वीर बनकर, उत्साह हम बढ़ाते।।


सुनकर पुकार दुख की, हृदय में शोक जाता।

करुणा के भाव आकर,रस करुण है जगाता।।


दृष्य देखें अद्भुत, आश्चर्य मन में आता।

अद्भुत रस का निर्झर, मन को सदा लुभाता।।


भक्तों के पास रहकर,मन को सजाती हिन्दी।

रस भक्ति का बहाती, सबको लुभाती हिन्दी।।

    

            


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