दीपावली
दीपावली
जय साहित्य के सारथी।
आया दीपों का त्यौहार।
करो रोशन अपना घर द्वार।।
रहे ना मन में तनिक विकार।
सभी को खुशियाँ मिलें अपार।।
दीप में डालो प्रेम का तेल।
बढ़े जिससे आपस में मेल।।
खत्म हो षड्यंत्रों का खेल।
बुराई की बिगसे ना बेल।।
श्रद्धा बाती दीप में डाल।
अंतर्मन से मिट जाए मलाल।
रहें निरोगी और खुशहाल।
माया का टूटे भ्रम जाल।।
सदा ऐसी फैले आरेख।
रहे ना कहीं स्याह की रेख।।
फलें फूलें सद्धर्मालेख।
चुभे ना अपशब्दों की मेख।।
चलें ना कहीं व्यंग्य के बान।
पले ना मन अपने अभिमान।
घटे ना कभी किसी की शान।
अमिट हो भारत की पहचान।।
सच की ध्वजा सदा हो हाथ।
धैर्य का कभी न छूटे साथ।।
झुकाऊँ सदा बड़ों को माथ।
यही मैं विनय करूँ रघुनाथ।।
