STORYMIRROR

Sandeep Prajapati

Abstract

2  

Sandeep Prajapati

Abstract

हिन्द के वीर

हिन्द के वीर

1 min
37

ये शेर हिन्द के वीर है 

हर एक कि नजरे तीर है

संभल के कदम बढ़ाना

यहां हर बच्चा सूरवीर है


अपनी छोटी नज़रों से बड़े सपने ना देख

अगर शौक़ है तुझे तो हिंदी इतिहास देख

ना जाने कितने आए हिन्द की भूमि पर

क्या हस्र हुआ उनका आंख खोल और देख


हम कभी किसी पर पहले वार नहीं करते

हम अपने पर आ जाय तो रिहा नहीं करते

अच्छा होगा गीदड़ भभकी तू बंद कर देता

हम हिन्दुस्तानी किसी के बाप से नहीं डरते


चाहे अपने आका को बुला तू चाहे चाचा को बुला

हमे कोई फर्क नहीं होगा चाहे अपने दादा को बुला

यहां तो सब तेरे बाप बन बैठे है अपने झोपड़ी में

माफ कर देंगे एक बार प्यार से अपने पापा को बुला!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract