STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Tragedy

4  

Sudhir Srivastava

Tragedy

हे ईश्वर तू ही बता

हे ईश्वर तू ही बता

1 min
298


हे ईश्वर तू ही बता

दोष जमाने का है या मेरी किस्मत का

आखिर मैं भी तो एक बेटी बहन और मां हूं

जन्मदात्री निर्माणकर्ता भी हूं इन्सान की

उससे पहले मैं एक इंसान हूं 

मेरी भी जरुरतें हैं,भूख है

पापी पेट की आग बुझाने की मजबूरी है

तभी तो हाथ फैलाए हूं

कुछ भीख ही सही पेट भरने के लिए

तो कुछ चाहिए ही सही।

लाख सब मेरे अपने हैं

पर मेरे लिए तो सब महज सपने हैं।

सबने दुत्कारा ही है मुझे

तो मैंने भी सबसे आस छोड़ दी है,

खुद को भाग्य के सहारे छोड़ दिया है

मिल गया तो खा लिया 

वरना पेट दबाकर, भगवान का नाम लेकर

चुपचाप सो गई।

सब ऊपर वाले की माया है

या भाग्य का खेल

मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आया

सिवाय इसके कि कोई किसी का नहीं

सब सिर्फ छलावा है

हे ईश्वर तू बता तेरी दुनिया में

कब मेरा बुलावा है,

मुझे इस धरा पर भेज तूने भला 

मुझ पर ये कैसा जुल्म ढाया है

क्या अभी भी तू कुछ नहीं समझ पाया है?

मुझे तिगुनी का नाच नचाया है?

इससे आखिर तूने भला क्या सुख पाया ? 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy