STORYMIRROR

Mahavir Uttranchali

Inspirational

2  

Mahavir Uttranchali

Inspirational

हार किसी को भी

हार किसी को भी

1 min
217

हार किसी को भी स्वीकार नहीं होती

जीत मगर प्यारे हर बार नहीं होती


एक बिना दूजे का, अर्थ नहीं रहता

जीत कहाँ पाते यदि हार नहीं होती


बैठा रहता मैं भी एक किनारे पर

राह अगर मेरी दुशवार नहीं होती


डर मत लहरों से, आ पतवार उठा ले

बैठ किनारे, नैया पार नहीं होती


खाकर रूखी-सूखी, चैन से सोते सब

इच्छाएँ यदि लाख-उधार नहीं होती


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational