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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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गोदन-टैटू

गोदन-टैटू

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आधुनिकता के इस दौर में

इसका भी आधुनिकीकरण हो गया है,

गोदन तो फिर भी ठीक है

टैटू ने तो हमें नंगा कर दिया है।


वो समय और था

जब महिलाएं पतियों का नाम

हाथों में गुदवाती थीं,

क्योंकि तब उन्हें पति का

नाम न लेने की ही 


सीख दी जाती थी,

तब गोदन दिखा कर ही

वो पति का नाम बताती थीं।


तब आज की तरह का 

समय भी नहीं था,

तब सुख आये दु:ख

उसी के साथ

जीवन गुजार लेती थीं।


आज तो सब कुछ 

अनिश्चित हो गया है,

अब तो ऐसा भी होता

दिख जाता है,


एक,दो,तो छोड़िए

तीसरे चौथे के साथ भी

गुजारा नहीं हो पाता है,

क्योंकि बहुत बार अहम

आड़े आ जाता है।


शा छा रहा है

टैटू के नाम पर इंसान

शरीर काला करवा रहा है,

हद तो तब हो रहा है


कि इंसान खुद से

बड़ी बेहयाई से खुद ही

नंगा हो रहा है,

मार्डन कहलाने का लोभ

छोड़ नहीं पा रहा है।


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