Kundan Victorita
Abstract
चलो इस गणतंत्र दिवस पर
कुछ ऐसा कर जाते हैं
अलग हुए गण और तंत्र को
एक साथ जोड़ जाते हैं।
इश्क-ए-किताब
भारत
परिचय
ये कैसा एहसास...
गण और तंत्र
तिरंगा
वतन
हिन्दुस्तान ह...
कौन है ?
हिंदी
सच्चाई का लेकर शस्त्र, और अहिंसा का ले अस्त्र। सच्चाई का लेकर शस्त्र, और अहिंसा का ले अस्त्र।
हर सांस के साथ इस पलती हुयी हर काश के साथ। हर सांस के साथ इस पलती हुयी हर काश के साथ।
तेरे दिल में मकान हो जाये,,,,, मेरा अब इम्तिहान हो जाये। तेरे दिल में मकान हो जाये,,,,, मेरा अब इम्तिहान हो जाये।
क्योंकि, मेरी बेटी तो मेरा सपना है क्योंकि, मेरी बेटी तो मेरा सपना है
सिर्फ टूटी हुई दीवारों से नहीं बनते खंडहर। सिर्फ टूटी हुई दीवारों से नहीं बनते खंडहर।
प्रकृति सदा करती है न्याय, नहीं वह सहती अन्याय। प्रकृति सदा करती है न्याय, नहीं वह सहती अन्याय।
अपना कर्म निभाता चल रहा हूं डगर पे I हर एक की खबर रखता हूं अपनी नजर पे । अपना कर्म निभाता चल रहा हूं डगर पे I हर एक की खबर रखता हूं अपनी नजर पे ।
आए जरूर दिल को जला कर चले गए। नासूर मेरे घाव बना कर चले गए। आए जरूर दिल को जला कर चले गए। नासूर मेरे घाव बना कर चले गए।
चौतरफा है हाहाकारी, आस प्रभु तुम लोग।। बदला है जमाना चौतरफा है हाहाकारी, आस प्रभु तुम लोग।। बदला है जमाना
हर किसी पे ही उल्फ़त लुटाती रही जिंदगी प्यार के गीत गाती रही। हर किसी पे ही उल्फ़त लुटाती रही जिंदगी प्यार के गीत गाती रही।
विद्वानों को आजकल, लोग रहे हैं भूल, देते उनको मान जो हैं अनपढ़ मक्कार। विद्वानों को आजकल, लोग रहे हैं भूल, देते उनको मान जो हैं अनपढ़ मक्कार।
ज़िन्दगी की धुंध में एक अक्स धुँधला सा है दिखता। ज़िन्दगी की धुंध में एक अक्स धुँधला सा है दिखता।
दो के छक्के बारा, शौचालय हो प्यारा। दो के छक्के बारा, शौचालय हो प्यारा।
वक़्त संग बदलता जीवन कुछ रोज सीखा कर जाता है।। वक़्त संग बदलता जीवन कुछ रोज सीखा कर जाता है।।
तुम हो तो हम हैं, तुम्हारा प्रेम अनुशंसा अनन्त है।। तुम हो तो हम हैं, तुम्हारा प्रेम अनुशंसा अनन्त है।।
चश्म-ए-तर से जो, बहे जाते हैं अश्क समंदर ना सही, मगर कोजा-ए-मुट्ठीभर तो हो… चश्म-ए-तर से जो, बहे जाते हैं अश्क समंदर ना सही, मगर कोजा-ए-मुट्ठीभर तो हो…
जब सामना हो अत्याचार से तो बंदूक़ नहीं कलम उठाइए। जब सामना हो अत्याचार से तो बंदूक़ नहीं कलम उठाइए।
शब्द नहीं मेरे पास बेटियों के लिए बगिया में खिला गुलाब वह शब्द नहीं मेरे पास बेटियों के लिए बगिया में खिला गुलाब वह
आडंबरों से दूर ही रहता नहीं कर्म कांड में वास आडंबरों से दूर ही रहता नहीं कर्म कांड में वास
क्यूँकि यादें उन्हीं लोगों के साथ सृजित होती हैं जो हमारे दिल के बेहद करीब होते हैं। क्यूँकि यादें उन्हीं लोगों के साथ सृजित होती हैं जो हमारे दिल के बेहद करीब होत...