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अंजनी कुमार शर्मा 'अंकित'

Abstract

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अंजनी कुमार शर्मा 'अंकित'

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गम भी भावना है

गम भी भावना है

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मुस्कुराओ, मुस्कुराना कहाँ मना है ?

पर दर्द भी पालना एक भावना है।


जिसके ह्रदय में किंचित दर्द का वास नही,

वह अपूर्ण मानव इस दुनिया में खास नही।


क्या ? इसी तरह मुस्कुराओगे जनाजे पर,

मुस्कुरा दोगे क्या ? पीड़ा सहते दरवाजों पर।


गंभीर बनो, दर्द भी पालो इंसान बनोगे।

बिना गम के इस धरा पर कैसे रहोगे ?


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