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raviteja kasturi

Abstract Drama Others

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raviteja kasturi

Abstract Drama Others

एक लम्हा, उम्र भर

एक लम्हा, उम्र भर

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कहाँ से आई थी वो रौशनी, ख़बर भी न थी,
मगर वो दिल में उतर जाएगी, ख़बर भी न थी।
वो एक हँसी थी कि बरसात की पहली बिजली,
यूँ उम्र भर मुझे तड़पाएगी, ख़बर भी न थी।
नज़र ने तीर चलाया तो मुस्कुराकर चल दी,
ये चोट रूह तलक जाएगी, ख़बर भी न थी।
तेरे ही ज़िक्र से आबाद हैं वीरानियाँ,
तेरी ही याद घर बनाएगी, ख़बर भी न थी।
मैं अपने अश्क तेरे नाम कर के बैठा हूँ,
ये रात और भी गहराएगी, ख़बर भी न थी।
हर एक मोड़ पे मैंने तेरी सदा रख दी,
हवा भी तुझको बुलाएगी, ख़बर भी न थी।
मैं अपनी रूह को तेरे सफ़र पे भेज चुका,
वो लौट कर भी न आएगी, ख़बर भी न थी।
अगर कभी मेरी आवाज़ तुझ तलक पहुँचे,
कहो कि जान भी आ जाएगी, ख़बर भी न थी।
वो एक लम्हा जो ठहरा था तेरी पलकों पर,
उसी में उम्र गुज़र जाएगी, ख़बर भी न थी।
"फ़िराक़" दिल ने जिसे अपनी क़ायनात कहा,
वही फ़क़त एक दुआ रह जाएगी, ख़बर भी न थी।


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