STORYMIRROR

SANIYA KHAN

Inspirational

4  

SANIYA KHAN

Inspirational

एक धधकती चिंगारी हूं मैं

एक धधकती चिंगारी हूं मैं

1 min
384

लाचार नहीं मजबूर नहीं

एक धधकती चिंगारी हूं मैं


एक नारी का आन हूं मैं,

ऊंची उड़ान भरने वाला तूफान हूं मैं


बादलों की छांव में भटकती हूं मैं,

बुराई की आखो मे खटकती हू मैं


बुराई के लिए घातक बीमारी हूं मैं,

लाचार नहीं मजबूर नहीं

एक धधकती चिंगारी हूं मैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational