STORYMIRROR

SIMRAN MAITHANI

Abstract

4  

SIMRAN MAITHANI

Abstract

एक दौर वो था एक दौर ये है..

एक दौर वो था एक दौर ये है..

1 min
467

एक दौर वो था

एक दौर ये है


एक दास्तान वो थी

एक दास्तान ये है


कुछ पुराने किस्से कहानियाँ है

कुछ नई नादानियां है


कुछ धुंधले चेहरे यादों में है

कुछ नए चेहरे आंखों में है


कुछ अंधेरों में रोशन उजाले हैं

कुछ सन्नाटों में शोर की पुकारे हैं


एक मोड़ वो था

एक मोड़ ये है


एक वक्त वो था

एक वक्त ये है


कुछ सुकून कुछ राहतें है

कुछ सीने में दफ़्न चाहतें है


कुछ आँखों में कैद राज़ है

कुछ दिल में छुपी आस है


कुछ पाने की ख्वाइश कुछ खोने का डर है

कुछ नई मुस्कुराहटें कुछ नए दर्द है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract