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SIMRAN MAITHANI

Abstract

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SIMRAN MAITHANI

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आशिक़ी का आलम

आशिक़ी का आलम

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कुछ इस कदर आशिक़ी

का आलम छाया है।

के हर ज़र्रे में पाया उसका साया है

जब दूर होकर भी कोई पास होता है


वो एहसास कुछ खास होता है

इस तेज़ रफ़्तार जिंदगी में व्यस्त

रहना दुनिया का दस्तूर है


हमें भी फुरसत कहाहमे तो

उसकी यादों में रहना मशरूफ है

माना इंतज़ार की घड़ी लंबी है

ख्वाइशें भी होती कहा मुकम्मल जल्दी है 


तमन्नाह होगी पूरी दिल की

मुलाक़ात होगी जल्द ही

उस दिन सूरज थोड़ा पहले निकल आएगा

उस दिन चाँद ढलना भूल जाएगा।


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