STORYMIRROR

Tarun Trivedi

Abstract

3  

Tarun Trivedi

Abstract

एक अपना देश है

एक अपना देश है

1 min
240

एक मुल्क में रहेकर भी तेरा मेरा द्वेष है 

बंद करो लड़ाई, सोचो तू और मैं सब एक है 

नाम देके धर्म का जो बन रहा कोई नेक है 

याद रखना इस जहाँ में कुछ भी नहीं शेष है 

ए मनुष्य क्यों ये तेरा दिल भी इतना सख्त है 

बह रहा लहू ये जितना, इंसानियत का रक्त है 

सुन ले तू भी इस जहाँ में तेरा भी कोई वक़्त है 

चल बसेगा तू वहा, जहाँ खुदा का तख़्त है 

पैसों भरा जीवन भी तो प्यार का गरीब है 

तू ना जाने कितना तू अब अंत के करीब है 

समजो बस तुम इतना की बदल रहा तो वेष है 

है ज़मीन एक ही और एक अपना देश है 

एक अपना देश है, तेरा मेरा देश है 

हम सभी का देश, एक अपना देश है 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract