Ravi Shah
Romance
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रोज़ जब पीता ...
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हज़ार टुकडे, ...
समझ नहीं पा रही मेरा आँचल छोटा है या तुम्हारे एहसान बड़े क्यूँ समेट नहीं पा रही। समझ नहीं पा रही मेरा आँचल छोटा है या तुम्हारे एहसान बड़े क्यूँ समेट न...
हो जाती है पूर्ण तुम्हीं से, काव्य-कामिनी कञ्चन। हो जाती है पूर्ण तुम्हीं से, काव्य-कामिनी कञ्चन।
ताजग़ी, खुशबू, उफान, गर्माहट और मिठास लिए। ताजग़ी, खुशबू, उफान, गर्माहट और मिठास लिए।
हे सखी, तू प्रेम मूर्ति, बन उनके जीवन की पूर्ति, तू उनकी आलिंगन है, तू ही उनकी साजन भी... हे सखी, तू प्रेम मूर्ति, बन उनके जीवन की पूर्ति, तू उनकी आलिंगन है, तू ही उनकी स...
बेशक खामियाँ बहुत हो मुझमें, पर प्यार तो तुम से करती हूँ। बेशक खामियाँ बहुत हो मुझमें, पर प्यार तो तुम से करती हूँ।
इत्मिनान इतना कि स्वप्न में थी मैं और तुम अभी चालीसवें में हो। इत्मिनान इतना कि स्वप्न में थी मैं और तुम अभी चालीसवें में हो।
तुम सौंप दो अपना तन-मन मुझको मैं ग्रह लूँ तुम्हारा समर्पण। तुम सौंप दो अपना तन-मन मुझको मैं ग्रह लूँ तुम्हारा समर्पण।
ना आज ये रात बीतेगी ना ही कोई समझ पाएगा , बारिश के इस आलम में जब वो यूं ही चला जाएगा, ना आज ये रात बीतेगी ना ही कोई समझ पाएगा , बारिश के इस आलम में जब वो यूं ही चल...
उसके बारे क्या कहां जाए, जो दिल के सबसे करीब है...? आप क्या कहते है...? नहीं बताओगे...? तो चलो हम बत... उसके बारे क्या कहां जाए, जो दिल के सबसे करीब है...? आप क्या कहते है...? नहीं बता...
जो जब जब मुझ पर पड़ती है मुझे थोड़ा और तेरा कर देती है। जो जब जब मुझ पर पड़ती है मुझे थोड़ा और तेरा कर देती है।
एक मद सा है तुम्हारा होना, बहुत कुछ कह जाता है, तुम्हारा मौन। एक मद सा है तुम्हारा होना, बहुत कुछ कह जाता है, तुम्हारा मौन।
कुछ पल के लिए, जब कमर पर ब्रश उसने चलाया होगा। कुछ पल के लिए, जब कमर पर ब्रश उसने चलाया होगा।
हां ! अकेली नहीं होती हूं मैं जब तुम मेरे पास नहीं होते। हां ! अकेली नहीं होती हूं मैं जब तुम मेरे पास नहीं होते।
मोहलत खुदा से मांग लाता अगर मैं मन पढ़ पाता। मोहलत खुदा से मांग लाता अगर मैं मन पढ़ पाता।
अमलतास सी वफा की छाँव ही छाँव बरसती है। अमलतास सी वफा की छाँव ही छाँव बरसती है।
उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई। उदासियों का कर के आलिंगन, ले लो सुबह सवेरे अंगड़ाई।
जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो। जो तुम्हारा ही नहीं, उसे क्यों अपनी ज़िन्दगी समझते हो।
प्रीति रजनी जगाने लगती सुर्ख छुअन होती तन-मन में। प्रीति रजनी जगाने लगती सुर्ख छुअन होती तन-मन में।
हवा में उड़ते सूखे पत्ते, सच्चे प्रेम के कुछ किस्से गाते पंछी। हवा में उड़ते सूखे पत्ते, सच्चे प्रेम के कुछ किस्से गाते पंछी।
तलब चाय की मुझे लगी थी, और रसोई में चाय बनाते तुझे देखा है मैंने। तलब चाय की मुझे लगी थी, और रसोई में चाय बनाते तुझे देखा है मैंने।