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Dr.Purnima Rai

Inspirational

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Dr.Purnima Rai

Inspirational

ए राही !!!

ए राही !!!

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मानव जीवन है अलबेला 

है हर इक इंसान अकेला

चाहे नित नवीन मंजिल को

बीतती नहीं दुख की बेला!!


भास्कर नव किरणें फैलाता है

भँवरा फूलों पर मंडराता है

कुदरत का मधुरिम सौन्दर्य

जीवन उपवन महकाता है!!


मधुरिम रिश्तों की अभिलाषा

मन में जगाती नई आशा

डग भरता राही जल्दी से

छा ना जाये कहीं निराशा!!


सुख वैभव इकट्ठे करता है

आकाश उड़ाने भरता है

औरों को सुख देने खातिर

हर पल विपदाएं सहता है!!


पत्तों की मन्द सरसराहट

पंछियों की सुन चहचहाहट

बीती बातों की स्मृतियों से

आए अधर पर मुस्कुराहट!!



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