दशहरा की शुभकानाएं
दशहरा की शुभकानाएं
'अँधेरे में आज उजाला होगा,
पाप-पुण्य का हर हिसाब होगा,
उसके घर में देर है, अंधेर नहीं,
जूठ, फरेब, हिंसा-अहंकार,
सब मिट्टी के समान होगा,
जब,
दिल की आवाज दिमाग समझेगा ,
समझके उसका पालन करेगा,
कंकड़ भरी राह पर खुद चलेगा,
सच्चाई से वो कभी मुँह न फेरेगा,
सोच बदलने से कुछ खास फरक नहीं पड़ेगा,
उस नहीं सोच के पालन से विश्व बदलेगा।'
