दीपावली के क्या कहने!!
दीपावली के क्या कहने!!
दीपों की जगमगाहट से
मन प्रफुल्लित हो उठता है।
पर , पटाखों की गूॅंज से
मन बोझिल हो उठता है।
यदि पटाखों की जगह मिठाइयों
के डब्बे गरीबों में बाॅंटे जाए ,
तो पटाखों के गूॅंज से बेहतर होगी
गरीबों की हृदय की उल्लास की गूॅंज।
दीपावली के दिन पशु - पक्षियों
का विशेष ख्याल रखा जाय ,ताकि ,
उन्हें पटाखों से नुकसान न हो ,तो
इससे बेहतर दीपावली क्या होगी?
और अस्पतालों में मरीजों के लिए
दीपावलीके 'उपहार' स्वरूप उनकी
दवाइयों के पैसे 'पटाखों ' की जगह
दिए जाऍं,तो दीपावली के क्या कहने!!
ये होगी इन्सानियत की दीपावली,
ये होगी सच्ची, निस्वार्थ, स्नेह की,
हम भारतीयों की शुभकामनाओं से.
.जगमग,जगमग जगमगाती दीपावली।
