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ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम

Inspirational

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ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम

Inspirational

धन और मन

धन और मन

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जगत मिलत धन

दमकत तन मन।

बिन धन यह मन

विकल रहत है।


निशि दिन पल पल

अति धन हलचल।

विषय पकड़ धन

कुटिल बनत है।


चढ़त अहम जब

मिटत विनय तब।

जग हर नर लख

धन बदलत है।


कहत जगत सब

अति धन विष सम।

सुमति करत कुछ

कटक मिटत है।।


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