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Gurudeen Verma

Abstract

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Gurudeen Verma

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देखो रुपयों की बात पर

देखो रुपयों की बात पर

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देखो रुपयों की बात पर, दोस्ती है कगार पर।

टूटने लगे हैं रिश्ते सब,और प्यार है कगार पर।।

देखो रुपयों की बात पर------------।।


मानते हो क्यों बुरा तुम,बात मैंने दिल की कही है।

दोस्त सारे बहक गये हैं, और वादें है कगार पर।।

देखो रुपयों की बात पर----------।।


तुम कहते हो कि मुझको , दिया है किसी ने लालच।

भूला दिया है साथ मेरा , और ईमान है कगार पर।।

देखो रुपयों की बात पर-----------।।


यह सच है कि मैं यहाँ हूँ , परदेशी और एक अजनबी।

इसलिए नहीं मिली पनाह, और इंसानियत है कगार पर।।

देखो रुपयों की बात पर-----------।।


गलतफहमी है मेरे लिए,नहीं कोई भरोसा किसी को मेरा।

बिकता है इंसान बाजार में, और संस्कृति है कगार पर।।

देखो रुपयों की बात पर-----------।।


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