देखो रुपयों की बात पर
देखो रुपयों की बात पर
देखो रुपयों की बात पर, दोस्ती है कगार पर।
टूटने लगे हैं रिश्ते सब,और प्यार है कगार पर।।
देखो रुपयों की बात पर------------।।
मानते हो क्यों बुरा तुम,बात मैंने दिल की कही है।
दोस्त सारे बहक गये हैं, और वादें है कगार पर।।
देखो रुपयों की बात पर----------।।
तुम कहते हो कि मुझको , दिया है किसी ने लालच।
भूला दिया है साथ मेरा , और ईमान है कगार पर।।
देखो रुपयों की बात पर-----------।।
यह सच है कि मैं यहाँ हूँ , परदेशी और एक अजनबी।
इसलिए नहीं मिली पनाह, और इंसानियत है कगार पर।।
देखो रुपयों की बात पर-----------।।
गलतफहमी है मेरे लिए,नहीं कोई भरोसा किसी को मेरा।
बिकता है इंसान बाजार में, और संस्कृति है कगार पर।।
देखो रुपयों की बात पर-----------।।
