STORYMIRROR

Mukesh Kumar Modi

Inspirational

3  

Mukesh Kumar Modi

Inspirational

डर को डराओ

डर को डराओ

1 min
36

अपनी मंज़िल पाने की तो सबको रहती चाहत

किन्तु हम डरते रहते सुनकर विघ्नों की आहट


यूँ ही अगर जीवन भर हम डर से डराए जाएंगे

पुष्प समान खिला हुआ जीवन कभी ना पाएंगे


इसी भय के कारण हम अपनी शक्तियां गंवाते

अपनी ही मंज़िल से हम खुद ही दूरियाँ बढ़ाते


भय से ग्रसित होकर कभी जीवन नहीं बिताओ

डराने वाली कोई बात अपने मन में ना बिठाओ


निडरता का गुण अपने जीवन में तुम अपनाओ

डर को तुम डराकर मंजिल को नजदीक लाओ



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational